एसजेवीएन 2040 तक पैदा करेगी 25 हजार मेगावाट बिजली

एसजेवीएन चेयरमैन नंदलाल ने कंपनी की उपलब्धियों व भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया

शिमला

एसजेवीएन केंद्र और हिमाचल सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है जो हिमाचल ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों और नेपाल और भूटान में बिजली परियोजनाओं का काम कर रहा है।

एसजेवीएन के चेयरमैन नंदलाल शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कंपनी की उपलब्धियों और आगे की योजनाओं की जानकारी मीडिया को दी।
नंदलाल शर्मा ने कहा है कि उनकी कंपनी 2040 तक 25 हजार मेगावाट बिजली पैदा करगी। उन्होंने कहा कि एसजेवीएन को 2023 तक 5000 मेगावाट, 2030 तक 12000 मेगावाट और 2040 तक 25000 मेगावाट कंपनी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
एसजेवीएन की अभी कुल 2016.51 मेगावाट की कैपेसिटी है। उन्होंने कहा कि कंपनी आगामी 9 वर्षों में 75000 करोड़ का निवेश करगी, जिसमें 23000 करोड़ का निवेश  अकेले हिमाचल में होगा।

नंद लाल शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में एसजेवीएन के हिमाचल प्रदेश में तीन प्रोजेक्ट बिजली उत्पन्न कर रहे हैं इनमें 1500 मेगावाट का नथापा झाकड़ी, 412 मेगावाट का रामपुर हाइड्रो पावर स्टेशन और 1.3 मेगावाट का एनजेएचपीएस सोलर प्लांट है। हिमाचल में एसजेवीएन दो और प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है इनमें 210 मेगावाट का लुहरी स्टेज-1 और 66 मेगावाट क्षमता का धौलासिद्ध प्रोजेक्ट शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ने सुन्नी डैम प्रोजेक्ट की डीपीआर भी तैयार कर दी है और जल्द ही इस परियोजना के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके अलावा एसजेवीएन हिमाचल में 8 अन्य प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। इनमें 172 मेगावाट का लुहरी स्टेज-2, 804 मेगावाट का जंगी थोपन, 175 मेगावाट का बारदंग, 232 मेगावाट का पूर्थी प्रोजेक्ट, 430 मेगावाट का रियोली दुगली प्रोजेक्ट, 104 मेगावाट का तांदी, 130 मेगावाट का रासिल प्रोजेक्ट, 267 मेगावाट का साची खास प्रोजेक्ट शामिल हैं।

कंपनी की भविष्य की योजनाओं की रूप रेखा रखी

नंदलाल शर्मा ने कंपनी की भविष्य की संभावनाओं के बारे में कहा कि एसजेवीएन के परियोजना पोर्टफोलियो का विस्तार जारी है और 11,000 मेगावाट को पार कर गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में तथा 2021-22 की पहली तिमाही में कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में 2525 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता की नई परियोजनाओं को शामिल कर लिया है। एसजेवीएन को नेपाल सरकार द्वारा नेपाल के भोजपुर जिले में 679 मेगावाट की लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा चिनाब बेसिन पर 104 मेगावाट की तांदी जलविद्युत परियोजना, 130 मेगावाट की राशिल जलविद्युत परियोजना और 267 मेगावाट की साचखास जलविद्युत परियोजना आबंटित की है। एसजेवीएन ने 24 सितंबर,2021 को इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (इरेडा) द्वारा जारी की गई आर एफ पी के आधार पर 1000 मेगावाट की ग्रिड कनेक्टेड सोलर पीवी सौर परियोजना प्राप्‍त की।
उन्होंने कहा कि परियोजना वित्तपोषण के लिए कम लागत वाले फंड की व्यवस्था करने के लिए बांड्स के माध्यम से प्रति वर्ष 6.1% की दर से 1000 करोड़ रुपए की राशि जुटाई गयी है तथा ईसीबी के माध्यम से 1.78% प्रति वर्ष की दर से 500 मिलियन अमरीकी डालर जुटाना योजनाबद्ध है।
कंपनी भारत, नेपाल तथा भूटान में जलविद्युत, ताप, सौर तथा पवन क्षेत्रों में परियोजनाओं को निष्‍पादित कर रही है। कंपनी ने अपनी यात्रा की रुपरेखा

कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत एक साल में 52.87 करोड़ खर्च किए

नंदलाल शर्मा ने कहा कि कंपनी ने अपनी परियोजना क्षेत्र के आसपास कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत स्वास्थ्य और सफाई, शिक्षा और कौशल विकास, बुनियादी ढांचागत और सामुदायिक विकास, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता और संस्कृति, धरोहर और खेलों का संरक्षण एवं बढ़ावा देने जैसे कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान भी कंपनी ने अपने कर्मचारियों के अलावा परियोजना स्थल के आसपास की जनता के लिए टीकाकरण अभियान चलाया है।
उन्होंने कहा कि एसजेवीएन ने 2020-21 में कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की पहल के तहत 52.87 करोड़ रुपए खर्च किए।
कंपनी के सभी कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण से बचाव की पहली डोज लग चुकी है और दूसरी डोज भी 80 फीसदी से अधिक लोगों को कवर चुकी है।

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