संयुक्त किसान मंच ने सरकार को चेताया, किसानों की अनदेखी पड़ेगी भारी

संयुक्त किसान मंच की शिमला में हुई बैठक, किसानों के मसलों पर की चर्चा
शिमला

संयुक्त किसान मंच ने कहा है कि सरकार उनकी मांगों और समस्यायों को नजर अंदाज कर रही है। संयुक्त किसान मंच ने सरकार को चेताया है कि किसानों की अनदेखी की उसको भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
संयुक्त किसान मंच की कार्यकारिणी की बैठक आज शिमला में संयोजक हरीश चौहान की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में संजय चौहान, दीपक सिंघा, सुंदर नैनटा, डॉ कुलदीप सिंह तंवर, सुशील, डॉ राजिंदर चौहान, सत्यवान, राम लाल, सुखदेव, त्रिलोक मेहता, कपिल, जिया नन्द आदि सदस्यों ने भाग लिया। इस बैठक में आगामी समय में मंच किसानों के मुद्दों को लेकर किस प्रकार से भविष्य मे कार्य करेगी इस पर चर्चा की गई। बैठक में प्रदेश की भाजपा सरकार के द्वारा किसानों के हितों पर हो रहे हमले पर गम्भीरता से चर्चा की गईं। सरकार इस हद तक किसान के हितों को नजरअंदाज कर रही है कि मंच द्वारा 24 अगस्त, 2021 को सरकार को माँगपत्र भेजा था और 13 सिंतबर, 2021 को 13 मांगो को लेकर एक ज्ञापन ब्लॉक, तहसील, उपमंडल व जिला स्तर से सरकार को भेजा गया था, परन्तु सरकार ने आज तक न तो मंच को बातचीत के लिए बुलाया और न ही किसानों की इन मांगों पर गौर तक किया है। सरकार के इस किसान विरोधी रवय्ये के विरुद्ध 27 सितंबर, 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान पर प्रदेश में भी संयुक्त किसान मंच ने अपनी मांगों को लेकर बंद व प्रदर्शन किए गए। परन्तु फिर भी सरकार ने किसानों की मांगों पर आज तक गौर नहीं कर रही है।
बैठक में एकमत से निर्णय लिया गया कि सरकार के इस किसान विरोधी रवय्ये के विरुद्ध भविष्य में आंदोलन तेज किया जाएगा और निर्णय लिया गया कि प्रदेश में हो रहे उपचुनाव सरकार से जवाब मांगा जाएगा क्योंकि सरकार द्वारा किसानों की मांगों पर आज तक गौर नहीं किया गया है। मंच पूरे प्रदेश में किसानों की मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में पोस्टर व किसानों की बैठकों के माध्यम से सरकार के इस किसान विरोधी रवय्ये के लिए विरोध स्वरूप जवाबदेही की मांग करेगी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच हिमाचल प्रदेश द्वारा भूमि अधिग्रहण,2013 कानून(पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुणा मुआवजा) को लागू करने की मांग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन का संयुक्त किसान मंच समर्थन करता है तथा 22 अक्टूबर को मंडी में होने वाले प्रदर्शन में भी भाग लेगा।
प्रदेश के अन्य हिस्सों में धान, गेंहू, मक्की व अन्य फसलों के लिए प्रदेश में मंडियां स्थापित कर इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) देकर खरीद करे। इसके अतिरिक्त प्रदेश में विभिन्न किसान संगठनों के द्वारा चलाए किसानों के संगठनों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों का भी समर्थन करती है और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध सभी किसान संगठनों को एकजुट कर इस आंदोलन को और मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया।
इस बैठक में निर्णय लिया गया कि मंच प्रदेश के किसानों से सरकार की इन किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष तेज़ करने की अपील करेगा और किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष तेज करेगा।

संयुक्त किसान मंच की मुख्य मांगें

1. सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) तय कर इसे कानूनी रूप से लागू किया जाए।
2.प्रदेश में धान, गेहूं, मक्की व अन्य फसलों की खरीद के लिए मंडिया स्थापित कर न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) के तहत खरीद करे।
3. हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाये।
4. प्रदेश की विपणन मण्डियों में ए पी एम सी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए व किसानों से प्रदेश में विभिन्न बैरियरों पर ली जा रही मार्किट फीस वसूली पर तुरन्त रोक लगाई जाए। जिन किसानों से इस प्रकार की गैर कानूनी वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।
5.किसानों के आढ़तियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में ए पी एम सी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।
6.अदानी व अन्य कंपनियों के CA स्टोर में इसके निर्माण के समय शर्तों के अनुसार बागवानो को 25 प्रतिशत सेब रखने के प्रावधान को तुरंत सख्ती से लागू किया जाए।
7. किसान सहकारी समितियों को स्थानीय स्तर पर CA स्टोर बनाने के लिए सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाए।
8.सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए।
9. प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा प्रदान राहत प्रदान करे।
10. प्रदेश में सरकार भूमि अधिग्रहण,2013 कानून(पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुणा मुआवजा) को लागू करे।
11. बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए।
12. प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य सभी बफसले वजन के हिसाब से बेची जाए।
13. HPMC व Himfed द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए।
14. खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।
15. कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाए।

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