पंजाब  जैसा  वेतनमान देने की मांग को लेकर मंडी में गरजे कर्मचारी

सयुंक्त कर्मचारी महासंघ ने मंडी में किया सम्मेलन व रैली निकालकर बनाया दवाब

सभी जिलों में महासंघ करेगा कर्मचारियों को मांगों को लेकर लामबंद

मंडी

 

नए वेतनमान में विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश सयुंक्त कर्मचारी महासंघ ने सभी जिलों में कर्मचारियों को लामबंद करना शुरू कर दिया है। रविवार को महासंघ ने मंडी में जिला के सभी विभागों के कर्मचारियों का महासम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें सभी विभागों के कर्मचारी नेताओं , शिक्षकों और कर्मचारियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी के 20 पदाधिकारियों ने भाग लिया जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, महासचिव हीरालाल वर्मा, मुख्य संगठन सचिव कुलदीप खरवाड़ा , वित्त सचिव खेमेंदर् गुप्ता , उपाध्यक्ष अरविंद मेहता, शमशेर सिंह ठाकुर सुनील चौहान , अरूण गुलेरिया, नरेश ठाकुर,तिलक नायक आदि प्रमुख रहे।

इस दौरान हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ की जिला मंडी की कार्यकारिणी का चयन किया गया जिसमें जिला मंडी का नेतृत्व श्री जगमेल ठाकुर को दिया गया और महासचिव की जिम्मेवारी मनोज शर्मा को व अन्य 11 सदस्यों को दी गई और जिला कार्यकारिणी का बाकी का विस्तार करने के लिए प्रधान और महासचिव को अधिकृत किया गया।

हिमाचल के लिए हुबहू पंजाब के जैसा वेतनमान मांगा

सम्मेलन में आए सभी कर्मचारी नेताओं ने अपने अपने विचार रखे और छठे वेतन आयोग की त्रुटियों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी । सभी कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में प्रस्ताव पारित किया कि हिमाचल सरकार पंजाब के वेतन आयोग को शत प्रतिशत मूल रूप से हिमाचल में लागू करें, जिससे कर्मचारियों का मूल वेतन 1-1- 2016 को पंजाब के कर्मचारियों के समरूप हो सके। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने छठे वेतन आयोग की त्रुटियों को उजागर किया और 15% वृद्धि वाले विकल्प से होने वाले नफा नुकसान के बारे में बताया।

 

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि 15 पर्सेंट वाला विकल्प केवल 2000 के बाद लगे 5910 के पे बैंड वाले कर्मचारी ही ऑप्ट कर पाएंगे और यही वह वर्ग है जिसे रिकवरी लग रही थी लेकिन इस नोटिफिकेशन के माध्यम से सरकार ने यह तो साफ कर दिया कि किसी तरह का एरियर कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा ।लेकिन इस संदर्भ में कुछ भी नहीं बताया गया कि क्या इनकी रिकवरी भी माफ कर दी जाएगी जो कि एक बहुत बड़ा चिंतनीय विषय है इस पर महासंघ ने अपनी चिंता व्यक्त की और सरकार से मांग की कि रिकवरी के बारे में सरकार स्पष्ट करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस 15% के विकल्प से कौन सा कर्मचारी पंजाब से कितना पीछे अभी भी चल रहा है । बहुत से वर्गों को तो 15 पर्सेंट की कैलकुलेशन से सरकार द्वारा अपने 3 जनवरी के नोटिफाइड वेतन आयोग अनुसार 4000 से 5000 तक इनिशियल में और पीछे जा रहा है । इसका मतलब हुआ कि इससे फायदा के बजाय नुकसान ज्यादा हो रहा है ।

 

 

 

इनिशियल स्टार्ट और 2 साल का राइडर खत्म करने की मांग 

कर्मचारी नेताओं ने कहा   कि इस स्थिति में कर्मचारियों को फायदे के बजाय नुकसान हो रहा है तो हम कह सकते हैं कि कर्मचारी इस पंद्रह पर्सेंट के विकल्प को नहीं चुन पाएंगे कारण यह है कि जब तक कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर 1-10-2011 से इनिशियल स्टार्ट और 2 साल का राइडर खत्म नहीं किया जाएगा तब तक इसका फायदा नहीं होने वाला है । साथ ही जब तक 4-9-14 टाइम स्केल की अनियमित्तायें खत्म कर उसके लाभ की गणना जनवरी 2022 तक नहीं की जाएगी और 2012 के ग्रेड पे रिवीजन के कारण कर्मचारियों का 4-9-14 का एक लाभ खत्म कर इस टाइम स्केल में जोड़ दिया गया था और अब जिन कर्मचारियों द्वारा 2 पॉइंट 5 9 फेक्टर चुना गया है उनके लिए 4-9-14 टाइम स्केल के एक लाभ की गढ़ना को वेतनमान निर्धारण में जब तक नहीं लिया जाएगा तब तक हिमाचल के कर्मचारी पंजाब के समरूप नहीं हो सकते हैं।‌‌‌‌ उनका कहना था कि  वेतनमान को पंजाब के संदर्भ में लागू करना है तो हमें बराबरी करनी आवश्यक है। यही नियम और नीति बताती है महासंघ ने वित्त विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हिमाचल प्रदेश मैं सबोर्डिनेट ज्यूडिशरी को छठा वेतन आयोग लागू करना ही भूल गया। लगभग जुडिशरी के 3200 कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का अभी भी इंतजार है।

 

 

अब अन्य जिलों में होंगे सम्मेलन व कार्यक्रम

 

वीरेंद्र चौहान ने कहा किइ सके बाद कल यानि 21 फरवरी को कांगड़ा के पालमपुर में और 22 तारीख को चंबा में यही क्रम दोहराया जाएगा ताकि कर्मचारियों की नाराजगी का एहसास सरकार तक पहुंचाया जा सके और शीघ्र ही कर्मचारियों की वित्तीय अनियमितताओं को समाप्त कर पंजाब के बराबर वेतनमान हिमाचल के कर्मचारियों को दिलाया जा सके। जिससे आने वाले समय में हिमाचल का कर्मचारी पंजाब की तुलना में मूल वेतनमान में बराबर हो सके। उन्होंने साफ किया कि हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक हिमाचल प्रदेश के समस्त कर्मचारियों को उनके लाभ नहीं दिलाये जा सके। यदि जरूरत हुई तो विधानसभा का घेराव भी किया जायेगा।

 

 

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