संयुक्त किसान मंच की सरकार को चेतावनी, मांगें न मानी तो होगा आंदोलन

शिमला

संयुक्त किसान मंच की बैठक आज संयोजक हरीश चौहान की अध्यक्षता में शिमला में आयोजित की गई। इस बैठक में सह संयोजक संजय चौहान, राजिंदर चौहान, दीपक, सत्यवान, सोहन ठाकुर, सुशील चौहान व अन्य कार्यकारिणी के सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक में चर्चा में सदस्यों ने कहा कि सरकार को अगस्त के महीने में एक 15 सूत्रीय मांगपत्र दिया गया था परन्तु सरकार द्वारा अभी तक किसानों को वार्ता के लिये न बुलाने से सरकार का किसान विरोधी रवय्या स्पष्ट हुआ है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार यदि किसानों को तुरन्त वार्ता के लिए नहीं बुलाती और मांगपत्र पर अमल नहीं करती तो सरकार के इस किसान विरोधी रवय्ये के विरुद्ध आंदोलन तेज किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच के विधानसभा के बाहर प्रदर्शन में संयुक्त किसान मंच भी लेगा हिसा

बैठक में निर्णय लिया गया है कि 14 अगस्त, 2021 को भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच के द्वारा धर्मशाला में विधानसभा के बाहर अपनी मांगों को लेकर किये जा रहे प्रदर्शन में संयुक्त किसान मंच भी इस प्रदर्शन में भाग लेगा। बीजेपी ने 2017 के चुनाव में वायदा किया था कि सत्ता में आने पर भू अधिग्रहण कानून, 2013 को लागू कर चार गुना मुआवजा प्रभावितों को दिया जाएगा। इस मुद्दे पर चुनाव के दौरान जो सरकार ने वायदा किया था उसको तुरंत लागू करे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 20 दिसम्बर, 2021 से ब्लॉक, तहसील व उपमण्डल स्तर पर बैठके आयोजित की जाएगी। इसमे अपनी 15 माँगो को लेकर एक पर्चा निकाला जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा कि वह किसानों की मांगों पर अमल क्यों नहीं कर रही है। इस पर्चे को पूरे प्रदेश में हर घर तक पहुंचाया जाएगा।

किसान मंच की मुख्य मांगें

1. सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) तय कर इसे कानूनी रूप से लागू किया जाए।
2.प्रदेश में धान, गेहूं, मक्की व अन्य फसलों की खरीद के लिए मंडिया स्थापित कर न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) के तहत खरीद करे।
3. हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाये।
4. प्रदेश की विपणन मण्डियों में एपीएमसी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए व किसानों से प्रदेश में विभिन्न बैरियरों पर ली जा रही मार्किट फीस वसूली पर तुरन्त रोक लगाई जाए। जिन किसानों से इस प्रकार की गैर कानूनी वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।
5.किसानों के आढ़तियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में एपीएमसी कानून के प्रावधानों के तहत किसानों को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।
6.अदानी व अन्य कंपनियों के CA स्टोर में इसके निर्माण के समय शर्तों के अनुसार बागवानो को 25 प्रतिशत सेब रखने के प्रावधान को तुरंत सख्ती से लागू किया जाए।
7. किसान सहकारी समितियों को स्थानीय स्तर पर CA स्टोर बनाने के लिए सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाए।
8.सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए।
9. प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा प्रदान राहत प्रदान करे।
10. प्रदेश में सरकार भूमि अधिग्रहण,2013 कानून(पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुणा मुआवजा) को लागू करे।
11. बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए।
12. प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य सभी बफसले वजन के हिसाब से बेची जाए।
13. HPMC व Himfed द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए।
14. खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।
15. कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरंत दी जाए।

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