अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा के बैनर तले दलितों की मांगों पर विधानसभा का घेराव

शिमला।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न दलित संगठनों द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति संघर्ष मोर्चा के बैनर तले दलितों की मांगों पर विधानसभा का घेराव किया गया। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये दलित समुदाय के लोग सुबह ग्यारह बजे पंचायत भवन शिमला में एकत्रित हुए। इसके बाद अम्बेडकर चौक चौड़ा मैदान तक एक रैली निकाली। इस दौरान एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला व उन्हें चौदह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में जगत राम,रवि कुमार,राजवंत नेगी,विजय कुमार व विक्की भूमक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया।

विधानसभा के बाहर हुए प्रदर्शन को मोर्चा अध्यक्ष मीरसुख,दलित शोषण मुक्ति मंच राज्य संयोजक जगत राम,सह संयोजक आशीष कुमार,भीम आर्मी अध्यक्ष रवि कुमार दलित,समता दल के अध्यक्ष दिले राम,रवि दास सभा अध्यक्ष कर्म चंद भाटिया,बाबा साहेब अम्बेडकर वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष प्रीत पाल मट्टू,नगर निगम शिमला सफाई कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष बलबीर सिंह,अखिल भारतीय वाल्मीकि विकास परिषद अध्यक्ष विक्की भूमक,मानव एकता न्याय मंच अध्यक्ष अजय कुमार,,कोली समाज के राज्य महासचिव राजेश खोश आदि ने सम्बोधित किया।

मोर्चा संयोजक मीर सुख ने कहा कि पंजाब के बाद सबसे अधिक दलित हिमाचल प्रदेश में रहते हैं। इस समुदाय से बीस विधायक हैं परन्तु वे अपनी भूमिका निभाने में विफल रहे हैं। सरकारी,अर्ध सरकारी व अन्य सभी प्रकार की नौकरियों में आरक्षण रोस्टर पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है। दलितों की जनसंख्या के हिसाब से अनुसूचित जाति जनजाति उप योजना के बजट आबंटित नहीं किया जा रहा है। दलितों की हत्याओं,सामाजिक भेदभाव व महिला उत्पीड़न की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण कानून 1989 को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने मांग की है कि आउटसोर्स,अनुबंध,ठेके,पार्ट टाइम,स्कीम वर्करज़,पीटीए,एसएमसी,स्वास्थ्य वर्कर,आशा वर्कर व पंचायत स्तर पर सभी प्रकार की भर्तियों में आरक्षण रोस्टर लागू किया जाए। सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में 85वें संविधान संशोधन को लागू किया जाए व बैकलॉग को तुरन्त भरा जाए। अनुसूचित जाति जनजाति उपयोजना,अत्याचार निवारण कानून 1989 को सख्ती से लागू किया जाए। अनुसूचित जाति जनजाति छात्रों की स्कॉलरशिप बहाल की जाए। दलित व महिला उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। राष्ट्रीय कर्मचारी आयोग,उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र,राजस्थान व दिल्ली की तर्ज़ पर राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का गठन किया जाए। निजी क्षेत्र में आरक्षण रोस्टर लागू किया जाए।

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